में तो एक चलता मुसाफिर हूँ कभी यहा तो कभी वहा फिकर तो मुझे तुम्हरी है क्यों कि तुम्हे चार दीवारों की आदत है । pankaj kashyap.
खुद गुमनाम हो गए हूँ ओर फिर भी लोगो से तेरा पता पूछ रहा हूँ। pankaj kashyap,
दर ब दर भटकने से अच्छा है की हम उसे भूल जाये उसे पाने की कोशिश में खुद को यू बरबाद नही करते है। pankaj kashyap .